ग्वालियर। मेडिटेशन गुरु, उपाध्याय श्री 108 विहसन्त सागर जी मुनिराज ससंघ के दिव्य सान्निध्य में शनिवार को श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन वरैया मंदिर, दानाओली, लश्कर, ग्वालियर में प्राचीन जिनालय के नव-निर्माण का शुभारंभ हुआ। यह शुभ कार्य उपाध्याय श्री 108 विहसन्त सागर जी मुनिराज
ससंघ द्वारा संपादित 76वां नवनिर्माण है, जो धर्म-प्रभावना की पावन परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान करता है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए
मेडिटेशन गुरु, मुनिराज ससंघ ने कहा कि मनुष्य को कभी भी उपकार नहीं भूलना चाहिए। एक अक्षर का उपदेश देने वाला भी उपकारी होता है। उन्होंने धर्म और आत्म-साक्षात्कार के महत्व पर जोर दिया। वरैया दिगंबर समाज का एकमात्र मंदिर दानाओली में स्थित था। मैं जब यहां धर्म कार्य के लिए आता था तो यहां की पूर्व समितियों के सदस्य कहते थे कि यह मंदिर छोटा है, इसका पुनर्निर्माण करना है। तब मैं कहता था कि जब समय आएगा तो अपने आप मंदिर का पुनर्निर्माण हो जाएगा। प्रभु की कृपा से आज मंदिर का भूमि-पूजन भी संपन्न हो गया और विशाल मंदिर बनने की ओर अग्रसर है।

