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SDM राजेश शाही पर भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप: ‘आरक्षण का गला घोंटा’, फर्जी तरीके से जारी किया जाति प्रमाण पत्र, EOW में शिकायत दर्ज!

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SDM राजेश शाही पर भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप: ‘आरक्षण का गला घोंटा’, फर्जी तरीके से जारी किया जाति प्रमाण पत्र, EOW में शिकायत दर्ज!

 

सतना/भोपाल। मध्य प्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण पत्र और प्रशासनिक मिलीभगत का एक बड़ा मामला गरमाता नजर आ रहा है। सतना के तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (SDM) राजेश शाही के खिलाफ प्रदीप अहिरवार ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), भोपाल में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन SDM ने पद का दुरुपयोग करते हुए और भारी भ्रष्टाचार कर एक ऐसे व्यक्ति को ‘अनुसूचित जाति’ का प्रमाण पत्र जारी किया, जो उस श्रेणी और क्षेत्र का पात्र ही नहीं था।

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार के अनुसार, श्रीमती वंदना बागरी (जो पूर्व विधायक स्व. जुगल किशोर बागरी की बहू और वर्तमान मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी की भाभी बताई जा रही हैं) मूल रूप से सिवनी जिले के ग्राम संगई की निवासी हैं और राजपूत समाज से ताल्लुक रखती हैं।

शिकायत में प्रमुख रूप से इन 3 गंभीर बिंदुओं को उठाया गया है:

क्षेत्रीय पात्रता का उल्लंघन: नियम के अनुसार, जाति प्रमाण पत्र बनाते समय आवेदक का 1950 में उस जिले में निवास करना अनिवार्य है जहाँ से प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। वंदना बागरी का मूल निवास सिवनी है, लेकिन राजेश शाही ने उन्हें सतना का निवासी बताकर प्रमाण पत्र जारी कर दिया।

संशोधन आदेश की अनदेखी:अनुसूचित जाति अधिनियम 2007 के संशोधन के अनुसार, ‘राजपूत बागरी/बागड़ी’ समाज को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता। राजेश शाही ने इस संवैधानिक तथ्य को पूरी तरह नजरअंदाज किया।

भ्रष्टाचार का आरोप: आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन SDM राजेश शाही ने इन तमाम कानूनी तथ्यों को ताक पर रखकर, मोटी रकम लेकर यह फर्जी प्रमाण पत्र जारी किया है।

प्रदीप अहिरवार की हुंकार: “आरक्षण खत्म करने वालों को नहीं छोड़ेंगे”

शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने कहा कि ऐसे अधिकारी चंद पैसों के लालच में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण को खत्म करने पर तुले हुए हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि अगले कुछ समय में इस मामले में अधिकारी पर कड़ी दंडात्मक कार्यवाही करवाई जाएगी।

 

जनता से अपील: “ऐसे जितने भी अधिकारी हैं जो पैसे लेकर फर्जी प्रमाण पत्र बना रहे हैं और हमारे वर्ग का हक मार रहे हैं, उनकी जानकारी साझा करें। हम उनके खिलाफ निर्णायक जंग लड़ेंगे।”

जांच के घेरे में ‘शाही’ कार्यकाल

राजेश शाही के कार्यकाल के दौरान किए गए कई अन्य फैसलों पर भी अब सवालिया निशान लग रहे हैं। EOW में शिकायत पहुंचने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अगर जांच सही दिशा में बढ़ती है, तो आने वाले दिनों में न केवल संबंधित अधिकारी बल्कि इसका लाभ लेने वाले रसूखदार चेहरों पर भी कानून का शिकंजा कस सकता है।

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