सतना में बोरवेल एसोसिएशन की हड़ताल से गहराया जल संकट
अब पानी के लिए ढीली करनी होगी जेब!
सतना। भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही सतना जिले में जल संकट की आहट तेज हो गई है। एक तरफ गिरता जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है, तो दूसरी तरफ बोरवेल एसोसिएशन की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने आम जनता की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। एसोसिएशन का साफ कहना है कि अब पुराने रेट पर बोरिंग करना संभव नहीं है, क्योंकि लागत में भारी इजाफा हो चुका है।
क्यों महंगी हो रही है बोरिंग?
बोरवेल संचालकों का तर्क है कि पिछले कुछ समय में उनके संचालन खर्च में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है:
मशीनों को चलाने के लिए भारी मात्रा में डीजल की खपत होती है, जिसकी कीमतें अब रिकॉर्ड स्तर पर हैं।
लोहे की कीमतों में तेजी के कारण बोरवेल में इस्तेमाल होने वाले बिट, रॉड और केसिंग पाइप महंगे हो गए हैं।
कुशल मजदूरों की कमी और मशीनों के स्पेयर पार्ट्स के दामों ने एसोसिएशन को रेट बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है।
जनता पर पड़ेगा दोहरी मार का बोझ
हड़ताल के कारण शहर और ग्रामीण इलाकों में सैकड़ों नए बोरिंग के काम रुक गए हैं। यदि एसोसिएशन की मांगें मानी जाती हैं, तो नई दरों के अनुसार प्रति फीट बोरिंग के दाम **₹20 से ₹50** तक बढ़ सकते हैं। मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए अपने घरों में बोरिंग कराना अब एक बड़ा आर्थिक बोझ बन जाएगा।
प्रशासन की चुप्पी और बदहाल व्यवस्था
शहर के कई इलाकों में नगर निगम की पाइपलाइन का काम अभी भी अधूरा है। ऐसे में लोग निजी बोरवेल पर ही आश्रित हैं। प्रशासन की ओर से अब तक रेट निर्धारण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे जनता में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते कोई बीच का रास्ता नहीं निकाला गया, तो गर्मियों में पानी के लिए हाहाकार मचना तय है।
जनहित की पुकार
सतना की जागरूक जनता की मांग है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करें। बोरवेल संचालकों के साथ बैठक कर एक ऐसा ‘न्यायसंगत रेट चार्ट’ तय किया जाए, जिससे संचालकों को भी नुकसान न हो और आम जनता को भी सस्ती दरों पर पानी उपलब्ध हो सके।
विकास की बड़ी-बड़ी बातों के बीच अगर जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। प्रशासन को चाहिए कि वह केवल फाइलों तक सीमित न रहकर धरातल पर पानी की समस्या का स्थाई समाधान निकाले।