पत्थर टूट सकते हैं, विचार नहीं, सतना में बाबासाहेब की प्रतिमा खंडित करने पर भारी आक्रोश
सतना/उचेहरा: समाज को समानता और संविधान का मार्ग दिखाने वाले डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा से डरने वाले अराजक तत्वों ने एक बार फिर अपनी ओछी मानसिकता का परिचय दिया है। उचेहरा थाना क्षेत्र के भराहटा गांव (टिकुरा तिराहा) में अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा बाबासाहेब की प्रतिमा को न केवल क्षतिग्रस्त किया गया, बल्कि उनके चेहरे पर काला पेंट पोतकर उनका अपमान करने का कुत्सित प्रयास किया गया।
आखिर क्या पूरा घटनाक्रम
शुक्रवार सुबह जब ग्रामीणों ने प्रतिमा की यह स्थिति देखी, तो समूचे क्षेत्र में तनाव और भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। लोगों का कहना है कि यह हमला केवल एक पत्थर की मूर्ति पर नहीं, बल्कि भारत के संविधान और उन करोड़ों लोगों की आस्था पर है जो बाबासाहेब को अपना आदर्श मानते हैं।
न्याय और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर उग्र ग्रामीणों ने नागौद-उचेहरा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए उचेहरा एसडीएम सुमेश द्विवेदी और भारी पुलिस बल मौके पर तैनात है। प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों को शांत करने और दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया जा रहा है।
संपादकीय दृष्टिकोण~ विचार अमर होते हैं
इतिहास गवाह है कि जब-जब महापुरुषों की प्रतिमाओं पर प्रहार किया गया है, उनकी विचारधारा और भी प्रखर होकर उभरी है।
आप एक मूर्ति का हाथ तोड़ सकते हैं, लेकिन उस कलम की ताकत को नहीं मिटा सकते जिसने भारत का भाग्य लिखा। चेहरे पर काला रंग पोतने वालों को यह समझना होगा कि बाबासाहेब का व्यक्तित्व किसी रंग या पत्थर का मोहताज नहीं है; वे करोड़ों लोगों के न्याय और समतावादी सोच में जीवित हैं।
कायरता का परिचय~ छिपकर प्रतिमा को नुकसान पहुंचाना वैचारिक खोखलेपन और कायरता की निशानी है।
अराजक तत्व यह भूल रहे हैं कि मूर्तियां खंडित की जा सकती हैं, लेकिन उन सिद्धांतों को कभी नहीं मारा जा सकता जो समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व की नींव पर टिके हैं। प्रशासन से अपेक्षा है कि वे जल्द से जल्द इन ‘वैचारिक अपराधियों’ को सलाखों के पीछे भेजें।