तस्वीर झूठ नहीं बोलती, पर सिस्टम बोल रहा है! करोड़ों फूंकने के बाद ‘स्मार्ट’ सतना के नलों से निकल रहा है गंदा पानी’
सतना। स्मार्ट सिटी के दावों की हवा निकालती यह तस्वीर सतना के कामता टोला (वार्ड 36) की है। इसे गौर से देखिए। क्या आपको इसमें पानी दिख रहा है? नहीं, यह पानी नहीं, बल्कि सिस्टम का ‘पाप’ है, जिसे शहर की एक बड़ी आबादी पीने को मजबूर है। नलों से निकलता यह गंदा, बदबूदार और पीला तरल पदार्थ बताता है कि करोड़ों रुपये के बजट और ‘हर घर जल’ के नारे धरातल पर कितने खोखले हैं।
हालात ऐसे कि पीना तो दूर, नहाना भी मुश्किल
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नलों में बदबूदार पानी आना अब एक आम बात हो गई है। कई बार तो पानी में कीड़े तक रेंगते दिखाई देते हैं। यह पानी इतना दूषित है कि इससे नहाना भी त्वचा रोगों को दावत देना है। ऐसे में पीने के लिए स्वच्छ पानी का इंतजाम करना आम जनता के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। गरीब परिवार, जो पानी खरीदने में असमर्थ हैं, वे मजबूरी में इसी जहरीले पानी को पीकर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
दावे बड़े-बड़े, सिस्टम नकारा
महापौर और नगर निगम के अधिकारी ‘स्मार्ट सिटी’ प्रोजेक्ट के तहत विकास के जो ढोल पीटते हैं, उसकी हकीकत कामता टोला में दम तोड़ रही है। सवाल यह उठता है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जनता को बुनियादी सुविधा—स्वच्छ पानी—क्यों नहीं मिल पा रहा है? क्या यह भ्रष्टाचार की गवाही नहीं देता? यह नकारा सिस्टम केवल फाइलों में विकास की इबारत लिख रहा है, जबकि हकीकत में जनता गंदगी और बीमारियों के बीच जीवन यापन कर रही है।
वार्डवासियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि वे बार-बार नगर निगम को शिकायतें कर चुके हैं, लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। क्या प्रशासन किसी बड़ी महामारी का इंतजार कर रहा है? कब तक सतना की जनता इस तरह सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा भुगतेगी?
जनता का सवाल:
महापौर योगेश ताम्रकार जी और नगर निगम कमिश्नर महोदय, क्या आप इस पानी को पी सकते हैं? अगर नहीं, तो आपके ही शहर की जनता को यह ‘जहर’ परोसने की अनुमति किसने दी? इस तस्वीर को देखिए, और अगर थोड़ी भी शर्म बाकी है, तो कामता टोला की जनता को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति दिलाइए।

