“ऐतिहासिक महाकुंभ” सतना की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब “ऐतिहासिक महाकुंभ” सतना की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब
चक्रवर्ती सम्राट अशोक की धम्म शोभायात्रा ने रचा नया इतिहास!
सतना- दिनांक 25 मार्च 2026 जब इतिहास करवट लेता है, तो दृश्य कुछ ऐसा ही होता है जैसा आज सतना की धरती पर दिखाई दिया। भारतीय बौद्ध महासभा जिला इकाई सतना एवं समस्त सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में निकली ‘विशाल धम्म शोभायात्रा’ ने न केवल सतना को केसरिया और धम्म के रंग में रंग दिया, बल्कि एकता की एक ऐसी मिसाल पेश की जिसे आने वाली पीढ़ियां दशकों तक याद रखेंगी।
अमौधा से टाउन हॉल तक, थम गई सतना की रफ्तार-
शोभायात्रा का शंखनाद डॉ. अंबेडकर प्रतिमा स्थल, अमौधा से हुआ। जैसे-जैसे यह कारवां पतेरी, उमरी और सिविल लाइन से होते हुए कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ा, सड़कों पर सिरों का एक समंदर नजर आने लगा। धवारी, सिटी कोतवाली, और जय स्तंभ चौक से गुजरते हुए जब यह जनसमूह पन्नीलाल चौक और अस्पताल चौक पहुंचा, तो पूरा शहर थम सा गया। जगत देव तालाब और कृष्ण नगर की गलियां “सम्राट अशोक अमर रहें” के नारों से गूंज उठीं।
महापुरुषों को नमन और वैचारिक संगम
यात्रा का समापन डॉ. अंबेडकर चौक (सिमरिया चौराहा) पर बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण और टाउन हॉल में महात्मा ज्योतिबा फुले एवं माता सावित्रीबाई फुले की प्रतिमाओं पर श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि वैचारिक क्रांति का उद्घोष था।
क्रांतिकारी नेतृत्व की हुंकार
इस ऐतिहासिक आयोजन के सारथी बने भारतीय बौद्ध महासभा के जिलाध्यक्ष सम्राट प्रदीप, जिनके साथ शैलेश सुखलाल कुशवाहा (पंकू भैया) और जिला कुशवाहा संघ के अध्यक्ष एड. गौरी शंकर कुशवाहा ने कंधे से कंधा मिलाकर नेतृत्व किया।
मंच पर उपस्थित प्रमुख सेनानी-
पतवारा के प्रख्यात समाजसेवी गया प्रसाद कुशवाहा, पंकज कुशवाहा, संभाग प्रभारी विजय वर्मा, सरपंच रामकेश अहिरवार (बाबूपुर), राजकुमार कुशवाहा (सचिव), एड के.पी. पाल, शिव प्रसाद कुशवाहा, पुष्पा बौद्ध, और ओबीसी नेता अंकित कुशवाहा सहित राजेश वर्मा, रविंद्र कुशवाहा, विश्व कुशवाहा (मौर्य पब्लिक स्कूल),संजय कुशवाहा, अखिलेश कुशवाहा, मोहन कुशवाहा, राजाभैया कुशवाहा सरपंच, पुष्पेंद्र कुशवाहा (दुरेहा), सरपंच रामकेश कुशवाहा (धौरहरा) जैसे सैकड़ों क्रांतिकारी साथियों ने इस महाकुंभ को सफल बनाया।
सहित उपस्थित युवाओं की टोली ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब सम्राट अशोक के सम्मान और उनकी विरासत के लिए सतना का समाज जाग चुका है। कलेक्ट्रेट में सौंपे गए ज्ञापन की गूंज अब शासन के गलियारों में सुनाई देगी।
“यह यात्रा नहीं, यह सतना के स्वाभिमान का जागरण है। सम्राट अशोक की विरासत अब घर-घर पहुंचेगी।”

