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भारत दुनिया का पांचवां सबसे प्रदूषित देश:कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा

कांग्रेस ने विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट में भारत को दुनिया का पांचवां सबसे प्रदूषित देश बताए जाने के बाद रविवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मांग की कि पिछले 10 वर्षों में पर्यावरण कानून में किए गए सभी जनविरोधी संशोधनों को वापस लिया जाए। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने एक बयान में कहा कि स्विट्जरलैंड की वायु गुणवत्ता प्रौद्योगिकी कंपनी आईक्यूएआईआर ने हाल में अपनी विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट-2024 जारी की है, जिसमें पाया गया है कि भारत दुनिया का पांचवां सबसे प्रदूषित देश है।राज्यसभा सदस्य रमेश ने एक बयान में कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक भारत में औसत सूक्ष्म पदार्थ कण (पीएम) का स्तर 50.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के पांच माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के वार्षिक मानक स्तर से 10 गुना अधिक है।कांग्रेस नेता ने दावा किया कि रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 100 सबसे प्रदूषित शहरों में से 74 भारत में हैं और राष्ट्रीय राजधानी नयी दिल्ली मेघालय के बर्नीहाट के बाद दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है।उन्होंने अपने बयान में कहा, ”प्रधानमंत्री के शासनकाल की कम ज्ञात त्रासदियों में शामिल राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बिगड़ती वायु गुणवत्ता और इसके प्रति सरकार की प्रतिक्रिया पर कम ही चर्चा होती है।”रमेश ने देश में वायु प्रदूषण से जुड़ी मौतों के बारे में अतीत में हुए कई अध्ययनों का हवाला भी दिया।उन्होंने कहा कि जुलाई 2024 की शुरुआत में प्रतिष्ठित लांसेट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में दावा किया गया था कि भारत में होने वाली 7.2 प्रतिशत मौतों के लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार होता है।पूर्व पर्यावरण मंत्री ने कहा कि लगभग उसी समय, विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सरकार की ओर से की जाने वाली कार्रवाई अपर्याप्त है।उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) का मुख्य ध्यान पीएम 2.5 के प्रमुख स्रोत औद्योगिक, वाहन और बायोमास उत्सर्जन के बजाय सड़क की धूल को कम करने पर केंद्रित है। पीएम 2.5 को प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों का प्रमुख कारक माना जाता है।रमेश ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने पर्यावरण संरक्षण शुल्क (ईपीसी) और पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) के 75 प्रतिशत से अधिक धन को खर्च नहीं किया है, जिससे स्थिति और खराब हो गई है।

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