Headlines

सतना ISBT: सीएम की घोषणा पर फिरा पानी, अफसरों की सुस्ती और नेताओं की ‘रोड़ेबाजी’ में फंसी जनता

सतना ISBT: सीएम की घोषणा पर फिरा पानी, अफसरों की सुस्ती और नेताओं की ‘रोड़ेबाजी’ में फंसी जनता

सतना शहर को ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था से मुक्ति दिलाने के लिए करोड़ों की लागत से बने इंटरस्टेट बस टर्मिनल (ISBT) का लोकार्पण तो बड़े ताम-झाम के साथ कर दिया गया, लेकिन मुख्यमंत्री की मंशा आज भी कागजों में दबी है। जिले के प्रशासनिक अधिकारियों की विफलता और स्थानीय राजनीति के चलते शहर की जनता आज भी सड़कों पर बसों की धमाचौकड़ी और घंटों लगने वाले जाम से जूझने को मजबूर है।

 

अधिकारियों की उदासीनता, जनता बेहाल

मुख्यमंत्री ने लोकार्पण के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शहर के पुराने बस स्टैंड को नए ISBT में पूरी तरह शिफ्ट किया जाए, ताकि शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम हो सके। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन इस आदेश को जमीन पर नहीं उतार सका है। आलम यह है कि शहर के बीचों-बीच दिनभर सैकड़ों बसों का जमावड़ा रहता है, जिससे राहगीरों और स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल हो गया है।

 

बस मालिकों की मनमानी और रसूखदारों का संरक्षण

हैरानी की बात यह है कि बस मालिकों को प्रशासन के नियमों का कोई खौफ नहीं है। वे बेखौफ होकर शहर के प्रतिबंधित क्षेत्रों से बसें संचालित कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस पूरी अव्यवस्था के पीछे कुछ स्थानीय भाजपा नेताओं का भी हाथ है। बताया जा रहा है कि इन नेताओं ने अपने निजी स्वार्थ और बस ऑपरेटरों के साथ साठगांठ के चलते प्रशासन पर दबाव बना रखा है, ताकि पुराना बस स्टैंड ISBT में शिफ्ट न हो सके।

 

सवालों के घेरे में प्रशासन

जनता अब सवाल पूछ रही है कि आखिर किसके दबाव में जिला प्रशासन मुख्यमंत्री की घोषणा को ठंडे बस्ते में डाले हुए है? क्या शहर की सुचारू यातायात व्यवस्था से बड़ा बस मालिकों का मुनाफा और नेताओं का दबाव है? यदि जल्द ही बस स्टैंड पूरी तरह शिफ्ट नहीं किया गया, तो करोड़ों की लागत से बने इस आधुनिक ISBT का औचित्य ही समाप्त हो जाएगा।

0Shares
hacklink satın al superbetin pashagaming jojobet jojobet giriş holiganbet instagram unban service instagram unban service