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विकास’ की अंधी दौड़ या विनाश का रास्ता? सतना में NH-135BG बाईपास निर्माण बना ग्रामीणों के लिए काल, प्रशासन मौन! मामला निर्माणाधीन रामपतगमन सोहावल मोड बायपास का

विकास‘ की अंधी दौड़ या विनाश का रास्ता? सतना में NH-135BG बाईपास निर्माण बना ग्रामीणों के लिए काल, प्रशासन मौन!

मामला निर्माणाधीन रामपतगमन सोहावल मोड बायपास का

ग्राउंड रिपोर्ट

सतना, मध्य प्रदेश:

प्रदेश सरकार जिस ‘विकास’ की झूठी पीठ थपथपाते नहीं थकती, वह असल में आम जनता के लिए कितनी जानलेवा साबित हो सकती है, इसका जीता-जागता और खौफनाक प्रमाण सतना जिले के सोहावल जनपद अंतर्गत ग्राम शेरगंज (पंचायत बाबूपुर) में देखने को मिल रहा है। यहाँ नेशनल हाईवे  NH-135BG बाईपास रोड का निर्माण कार्य विकास की आड़ में एक सुनियोजित प्रशासनिक अपराध बन चुका है। मुनाफे के लालच में अंधा ठेकेदार पर्यावरण और मानव जीवन की धज्जियां उड़ा रहा है, और पूरा प्रशासनिक अमला इस संगीन जुर्म में मूकदर्शक बनकर साझेदार बना हुआ है।

धूल का तांडव: ठेकेदार की बेखौफ गुंडागर्दी और दमघोंटू सियासत

जमीनी हकीकत यह है कि निर्माण एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के वायु प्रदूषण नियंत्रण नियमों को पैरों तले कुचल दिया है। गाइडलाइंस के मुताबिक दिन में कम से कम 3 से 4 बार अनिवार्य रूप से पानी का छिड़काव होना चाहिए, लेकिन साइट पर पानी की एक बूंद तक नहीं छिड़की जा रही है।

इस घोर लापरवाही ने पूरे इलाके को एक ‘गैस चैंबर’ में तब्दील कर दिया है:

घोंटा जा रहा बचपन और बुढ़ापा: चौबीसों घंटे अंधाधुंध गति से दौड़ने वाले भारी-भरकम डंपरों और ट्रकों के कारण उड़ने वाले धूल के जानलेवा गुबार ने स्थानीय बच्चों, बुजुर्गों और दमा के मरीजों का जीना मुहाल कर दिया है। गाँव का हर दूसरा नागरिक श्वास रोग और आंखों की गंभीर बीमारी की चपेट में है

घरों में ‘धूल का साम्राज्य’:  स्थिति इस कदर वीभत्स हो चुकी है कि लोगों के घरों के भीतर, पवित्र रसोइयों, खाने-पीने की सामग्रियों और खून-पसीने से सींची गई फसलों पर डस्ट की मोटी, जहरीली परतें जम चुकी हैं।

 फाइलों में दफन जनता की चीखें: सबूत चीख-चीख कर खोल रहे पोल

यह कोई प्रशासनिक अनदेखी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, जिसके पुख्ता कागजी सबूत मौजूद हैं:

महीनों पहले दी गई लिखित चेतावनी: त्रस्त ग्रामीणों ने 22 मई 2026 को ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के परियोजना निदेशक और जिला कलेक्टर सतना को लिखित अल्टीमेटम सौंपकर इस जानलेवा प्रदूषण से निजात दिलाने की गुहार लगाई थी। NHAI के मठाधीशों ने आवेदन पर मुहर लगाकर उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।

CM हेल्पलाइन पर ‘WIP’ का क्रूर तमाशा: जब स्थानीय स्तर पर साठगांठ के कारण कोई सुनवाई नहीं हुई, तो प्रदूषण नियंत्रण मंडल में शिकायत क्रमांक 38850600दर्ज कराई गई। आज हफ़्तों बीत जाने के बाद भी निरंकुश और संवेदनहीन सरकारी पोर्टल पर इस गंभीर मामले का स्टेटस सिर्फ ‘WIP’ (Work In Progress) लटक रहा है। जनता यहाँ घुट-घुट कर मरने को मजबूर है और अफसरशाही कागजी औपचारिकता खेल रही है।

सीधे सवाल: जनता के टैक्स पर पलने वाले हुक्मरान मौन क्यों?

आखिर इस बेखौफ निर्माण एजेंसी और ठेकेदार पर किसका वरदहस्त है, जो यह खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है?

क्या NHAI PIU सतना और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भ्रष्ट अधिकारियों को इस तबाही में अपना ‘हिस्सा’ मिल चुका है, जो उनकी आँखें और कान बंद हैं? क्या सरकार को जनता की जान की कीमत पर सिर्फ कंक्रीट का ढांचा खड़ा करना ही ‘विकास’ लगता है?

आर-पार की लड़ाई का शंखनाद:

अब ग्राम शेरगंज और आसपास के मोहल्ला वासियों का सब्र का बांध पूरी तरह टूट चुका है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संवेदनहीन ठेकेदार को अंतिम चेतावनी दे दी है—यदि इस जानलेवा प्रदूषण पर तत्काल रोक लगाकर नियमित जल छिड़काव शुरू नहीं किया गया और दोषी एजेंसी पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, तो पूरा क्षेत्र *उग्र जन-आंदोलन, चक्का जाम और तालाबंदी* के लिए सड़कों पर उतरेगा। इस जन-आक्रोश से उत्पन्न होने वाली कानून-व्यवस्था की स्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी केवल और केवल गूंगे-बहरे प्रशासन की होगी।

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