महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्धों को सौंपने की मांग तेज, राष्ट्रीय बौद्ध महासभा ने राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
सतना, 26 जून।
राष्ट्रीय बौद्ध महासभा (RBM) ने महाबोधि महाविहार, बोधगया के प्रबंधन को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ते हुए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं बिहार के मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी सतना के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। संगठन ने मांग की है कि बोधगया मंदिर अधिनियम (BTMC Act-1949) को समाप्त कर महाबोधि महाविहार का संपूर्ण प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति बोधगया स्थित पवित्र बोधिवृक्ष के नीचे हुई थी और सम्राट अशोक द्वारा निर्मित महाबोधि महाविहार विश्व बौद्ध समुदाय की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। संगठन का कहना है कि विश्व के अधिकांश धार्मिक स्थलों का संचालन संबंधित धर्म के अनुयायियों द्वारा किया जाता है, इसलिए महाबोधि महाविहार का प्रबंधन भी बौद्धों के हाथ में होना चाहिए।
राष्ट्रीय बौद्ध महासभा ने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था के कारण बौद्ध अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो रही हैं। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि 12 फरवरी 2025 से देशभर में बौद्ध भिक्षुओं, बौद्ध अनुयायियों एवं अंबेडकरवादी संगठनों द्वारा इस मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन, सम्मेलन और ज्ञापन अभियान चलाया जा रहा है।
संगठन ने यह भी दावा किया कि *10 मार्च 2025* को देश के विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे गए थे तथा अब इस आंदोलन को और व्यापक बनाया जा रहा है।
राष्ट्रीय बौद्ध महासभा ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं बिहार सरकार से मांग की है कि BTMC Act 1949 को निरस्त कर महाबोधि महाविहार का प्रबंधन पूर्णतः बौद्ध समाज को सौंपने के लिए आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
संगठन का कहना है कि यह मांग देश-विदेश के करोड़ों बौद्ध अनुयायियों की धार्मिक आस्था और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय है, जिस पर सरकार को शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।