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दुर्घटना की रिपोर्ट न लिखने पर पीडि़त ने न्यायालय में प्रस्तुत किया परिवाद पत्र, मामला पत्रकार राज सोलंकी का

दुर्घटना की रिपोर्ट न लिखने पर पीडि़त ने न्यायालय में प्रस्तुत किया परिवाद पत्र

सतना। गत दिवस दुर्घटना में एक पत्रकार के निधन के बाद जब थाना सिटी कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी तो मृतक के भाई की ओर से न्यायायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी के न्यायालय में एक परिवाद पत्र प्रस्तुत किया। उतैली निवासी विष्णु सोलंकी ने परिवाद पत्र प्रस्तुत करने के पीछे का कारण बताया कि पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज न किए जाने के कारण यह परिवाद पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

न्यायालय से मांगा न्याय

परिवादी का कहना है कि उनका बड़ा भाई राज सिंह सोलंकी पंजाबी मोहल्ला में निवास करता था। दिनांक 28/2/2026 को परिवादी के भाई की बच्ची का जन्मोत्सव था, जो समान लेने पंजाबी मोहल्ला से गौशाला चौक की ओर आ रहा था, तभी वाहन के ड्राइवर ने परिवादी के भाई को टक्कर मारा जिसकी टक्कर से मृतक राज सिंह सोलंकी 5 फिट गहरी नाली पर गिर गया। फिर उसी वाहन चालक ने अन्य लोगों की सहायता से जिला अस्पताल सतना छोड़ा था। सिर में साधारण चोंट होने से परिवादी और उसके परिवार वालों ने घटना को गंभीरता से नहीं लिया और वाहन चालक अस्पताल छोड़कर चला गया था। सिर फट गया था, जिसमें टांका लगा कर दिनांक 3/3/2026 को मृतक को डिस्चार्ज कर दिया था। उसी दिनांक को रात्रि को तबियत खराब होने के कारण पुन: शासकीय चिकित्सालय सतना पर भर्ती कराया गया। जिसमें डाक्टरों ने सिटी स्कैन कराया तो पता चला गंदा पानी फेफड़े में चले जाने के कारण मृतक को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। जिससे उनका निधन हुआ था।

कोतवाली ने नहीं लिखी रिपोर्ट 

उनका कहना है कि सिटी कोतवाली सतना ने एम.एल.सी के आधार पर प्रथम सूचना लिखने से मना कर दिया। इस कारण से परिवादी ने दिनांक 9/3/2926, 17/3/2026 को पुलिस अधीक्षक सतना को प्रथम सूचना नहीं लिखने की शिकायत प्रस्तुत किया और अनुरोध किया की प्रथम सूचना लिखवाये जाने को निर्देशित करें। उसी दिनांक को कलेक्टर सतना के यहां जनसुनवाई जिला कलेक्टर सतना के यहां आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया ताकि परिवादी के भाई के निधन की प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखकर वाहन एक्सीडेंट की जांच की जाय। किंतु थाना प्रभारी ने प्रथम सूचना लिखने से साफ मना कर लिया। क्योंकि थाना प्रभारी के ऊपर वाहन स्वामी का दबाव एवं प्रभाव था। ऐसी स्थिति में परिवादी ने परिवाद पत्र किया।

एफआईआर न करने पर जताया संदेह

परिवादी ने बताया कि परिवादी का भाई पत्रकारिता का कार्य करता था, इस कारण से थाना प्रभारी एवं अन्य पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध समाचार पत्रों में उनके दायित्वों के निर्वहन नहीं करने पर समाचार छापता था, इस कारण से रंजिश वस पुलिस अधिकारी ने मृतक के एम एल सी होने के बाद भी प्रथम सूचना रिपोर्ट नहीं लिखी है। परिवादी द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 के अंतर्गत प्रकरण की सुनवाई का निवेदन किया गया है जिससे परिवादी की रिपोर्ट लिखी जाए और संबधित पक्षों को दुर्घटना क्लेम का लाभ मिल सके।

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