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कोई शहर ‘स्मार्ट’ नहीं हो सकता, अगर वह अपने नागरिकों को बुनियादी गरिमा – साफ पानी, स्वच्छ हवा और सुरक्षा नहीं दे पाता~राहुल गांधी नेता विपक्ष 

कोई शहर ‘स्मार्ट’ नहीं हो सकता, अगर वह अपने नागरिकों को बुनियादी गरिमा – साफ पानी, स्वच्छ हवा और सुरक्षा नहीं दे पाता~राहुल गांधी नेता विपक्ष 

दिल्ली/सतना कांग्रेस नेता एवं नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बताया कि आपको मोदी सरकार का स्मार्ट सिटी मिशन तो याद ही होगा, जिसके तारीफों के पुल बांधते प्रधानमंत्री थकते नहीं थे!

अब जब यह योजना अपने समापन की ओर है- मैंने संसद में सरकार से इसके वास्तविक परिणामों का हिसाब मांगा।

और जो सच सामने आया उसे धोखे के अलावा कुछ और कह ही नहीं सकते- इस योजना का उद्देश्य कभी भी पूरे शहर का विकास करना ही नहीं था। देश को एक आधी-अधूरी योजना को पूरे बदलाव की कहानी बनाकर बेचा गया।

सवाल पूछे कि

– कैसे होते हैं स्मार्ट सिटी?

* सफलता किस आधार पर तय हुई?

* कितने शहर सच में बदले?

* लोगों के जीवन में क्या ठोस बदलाव आया?

तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। सिर्फ बताया गया की करीब ₹48,000 करोड़ खर्च हुए, और 97% प्रोजेक्ट “पूरे” बता दिए-

लेकिन अगर सब पूरा है, तो आपके शहर में क्या बदला?

ज़मीनी हकीकत अलग कहानी कहती है-

दूषित पानी और खुले सीवर से मौतें हो रही हैं,

गिरते पुल और धंसती सड़कें इस विफलता को और उजागर कर रही हैं।

यह योजना मोदी सरकार की असली कार्यशैली का उदाहरण है- घोषणाएँ बड़ी, प्रचार उससे बड़ा, और जवाबदेही शून्य। आप अपने शहर को सूची में खोजिए और खुद तय कीजिए- क्या यह वही “स्मार्ट सिटी” है जिसका सपना आपको बेचा गया था?

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