टाउन हॉल में हर्षोंल्लाष के साथ मनाई गई महात्मा ज्योतिवा राव फुले की 198वीं जयंती
महात्मा फुले 19वीं शताब्दी के महान समाज सुधारक थे–सिद्धार्थ कुशवाहा
सतना। द बुद्धाज भूमि , गरीब सेना , सामाजिक एवं बौद्धिष्ट संगठनों द्वारा 11 अप्रैल 2026 शनिवार को सामाजिक क्रांति के पितामह एवं शिक्षा के जनक राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिवा राव फुले जी की 198वीं जयंती स्थानीय * * माता सावित्री बाई-महात्मा ज्योति राव फुले **टाउन हाल परिसर में हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने कहा कि महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले ने 19वीं शताब्दी के महान समाज सुधारक, विचारक, लेखक, दार्शनिक और क्रांतिकारी थे, जिन्होंने जाति व्यवस्था, छुआछूत, महिलाओं के शोषण और अंधविश्वासों के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उन्हें “महात्मा” की उपाधि 1888 में मिली थी।
विधायक श्री सिद्धार्थ ने कहा कि वे माली जाति यानी शूद्र वर्ग से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता गोविंदराव फुले फूलों का व्यापार करते थे। बचपन में ही उन्हें जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा। एक ब्राह्मण दोस्त की शादी में उन्हें निमंत्रित किया गया, लेकिन उनके निम्न जाति होने पर अपमानित किया गया। इस घटना ने उन्हें जाति व्यवस्था की अन्यायपूर्णता का गहरा एहसास कराया। उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त की, जो उस समय दुर्लभ थी। उन्होंने थॉमस पेन जैसे विचारकों से प्रेरणा ली।
द बुद्धाज बुद्ध के जिलाध्यक्ष एड० के० पी० पाल ने कहा कि ज्योतिबा फूले जी ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार माना। उन्होंने कहा कि अज्ञानता ही शोषण की जड़ है। 1848 में उन्होंने पुणे में भारत का पहला लड़कियों का स्कूल स्थापित किया। उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले (जिन्हें उन्होंने खुद शिक्षित किया था) इस स्कूल की पहली महिला शिक्षिका बनीं। बाद में उन्होंने और भी स्कूल खोले, साथ ही निम्न जातियों के बच्चों के लिए स्कूल और रात्रि विद्यालय शुरू किए। वे स्त्री शिक्षा के जनक कहे जाते हैं।
पूर्व पार्षद महिंद वर्धन सिद्धार्थ पप्पू ने कहा कि सावित्रीबाई जी के साथ मिलकर उन्होंने बाल विवाह, सती प्रथा, विधवा विवाह विरोध और विधवाओं के लिए आश्रय गृह जैसे कार्य किए। उन्होंने ब्राह्मणवाद और वर्ण व्यवस्था की कड़ी आलोचना की। उनका मानना था कि यह व्यवस्था विदेशी आक्रमणकारियों (आर्यों) द्वारा थोपी गई है, जो मूल निवासियों (शूद्रों और अतिशूद्रों) को दबाती रही। उन्होंने छुआछूत मिटाने के लिए अपना कुआं सबके लिए खोल दिया और सभी वर्गों को अपने घर में आमंत्रित किया।
गरीब सेना के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व जनपद सदस्य सुदामा प्रजापति, ने कहा कि 24 सितंबर 1873 को उन्होंने सत्यशोधक समाज की स्थापना की। इसका उद्देश्य शूद्रों, अतिशूद्रों, महिलाओं और दबे-कुचले वर्गों को शिक्षित करना, उनके अधिकार दिलाना और पुरोहितों के बिना विवाह जैसी रस्में शुरू करना था। इस समाज में किसी भी जाति या धर्म का व्यक्ति शामिल हो सकता था। यह संगठन सामाजिक समानता का प्रतीक बना।
वरिष्ठ समाजसेवी स्वामीदीन कुशवाहा ने कहा कि उन्होंने किसानों की गरीबी और शोषण पर भी आवाज उठाई। ब्रिटिश शासन और स्थानीय जमींदारों द्वारा किसानों के शोषण की आलोचना की। वे पुणे नगरपालिका के कमिश्नर भी रहे ।
अखिल भारतीय पिछ्ड़ा वर्ग फेडरेशन के जिलाध्यक्ष सुखेंद्र सिंह ने कहा कि फूले जी ने मराठी भाषा में कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं, जिनमें सामाजिक अन्याय की तीखी आलोचना है। गुलामगिरि दासता पर, जिसमें उन्होंने जाति व्यवस्था को गुलामी का रूप बताया। उनका अंतिम कार्य, जिसमें उन्होंने सत्य, न्याय और समानता पर आधारित धर्म की बात की। ये रचनाएँ आज भी सामाजिक न्याय आंदोलनों की प्रेरणा हैं।
इंटक कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील गुप्ता ने कहा कि 1888 में स्ट्रोक से लकवा पड़ने के बाद उन्होंने बाएं हाथ से भी लिखना जारी रखा। उनकी विरासत डॉ. भीमराव आंबेडकर, पेरियार और अन्य सामाजिक न्याय के योद्धाओं को प्रेरित करती रही।
कांग्रेस सैनिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष संजय तिवारी ने कहा कि फुले जी ने साबित किया कि शिक्षा और तर्क से समाज को बदला जा सकता है। आज भी उनके विचार जाति मुक्ति, महिला सशक्तिकरण और समानता के आंदोलनों में जीवित हैं। ज्योतिबा जी की पत्नी सावित्रीबाई जी उनके संघर्ष की साथी थीं। उन्होंने न केवल स्कूल चलाए बल्कि समाज में महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों का सामना भी किया। दोनों की जोड़ी को स्त्री शिक्षा और सामाजिक न्याय की प्रतीक माना जाता है।
समाजसेवी रवि बौद्ध ने कहा कि महात्मा ज्योतिवा ने दिखाया कि सच्चा सुधार तब होता है जब हम सबसे कमजोर वर्ग को आगे लाएं। उनकी जयंती पर हम उनके आदर्शों को याद करते हुए समानता और न्याय की प्रतिज्ञा करते हैं।
इस अवसर पर सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा डब्बू, एड० के0पी० पाल , पूर्व पार्षद महिंद वर्धन सिद्धार्थ, गरीब सेना के जिलाध्यक्ष व पूर्ब जनपद सदस्य सुदामा प्रजापति, भंते करुणा सागर, रवि बौद्ध, पिछड़ा विंग फेडरेशन के जिला अध्यक्ष सुखेंद्र सिंह ,कांग्रेस इंटक अध्यक्ष सुनील गुप्ता, आनंद कुमार महाजन, मनीष सिंह, संजय तिवारी, धर्मेंद्र कुशवाहा,, एड० नन्दकुमार कुशवाहा, एस० पी० बौद्ध, अनमोल पाल अरुण कुशवाहा अनुराग पाल, रामसिया कुशवाहा, पूर्व सरपंच के० एल० सिद्धार्थ ,ज्ञासी पाल, सरपंच अशोक सतनामी, हीरालाल कुशवाहा, महेश चक्रवर्ती, केदार कुशवाहा, पूर्व सरपंच अनिल दाहिया, सुरेश प्रजापति, विजय देवसेना, , बृजेंद्र अग्निहाेत्री , विक्रम तामरे, साहिद कुमार साकेत, सिद्धार्थ कुमार साकेत, सत्यराज पाल, अरमान चौधरी, संगीता कुशवाहा, ओमप्रकाश बौद्ध, एड० उमेश राव दिनकर, प्रकाश वर्मा, राजमन वर्मा, शैलेंद्र गुप्ता,.जगन्नाथ प्रजापति, सहित सैकड़ों की संख्या में द बुद्धाज भूमि , गरीब सेना, एवं बौद्धिक सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहें।